byaj ki paribhasha evn shuddh byaj tatha sakal byaj me antar
Definition of interest and difference in net interest and gross interest

हम जानते हैं कि पूँजी के उपयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है| यदि पूंजी के सहयोग के बिना उत्पादन किया जाए तो उतना धन उत्पन्न नहीं होगा जितना पूँजी के सहयोग से होता है| चूँकि पूँजी उत्पादक होती है अतः उसके स्वामी को उत्पादित धन में एक भाग पाने का अधिकार होता है| इस प्रकार संयुक्त उत्पादन का वह अंश जो पूंजीपति को पूँजी के उपयोग के बदले में दिया जाता है, ब्याज (Interest) कहलाता है

ब्याज (Interest) शब्द की विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने विभिन्न प्रकार से परिभाषा दी है, जो इस प्रकार है
रिचर्ड के अनुसार, "ब्याज मुख्यतः प्रतीक्षा का प्रतिफल है"
कींस के अनुसार, "ब्याज एक निश्चित अवधि के लिए द्रव्य के तरलता परित्याग का पुरस्कार होता है"

ब्याज के प्रकार -
ब्याज दो प्रकार का होता है
(a) शुद्ध व्याज अथवा वास्तविक ब्याज
(b) कुल ब्याज अथवा सकल ब्याज

शुद्ध ब्याज अथवा वास्तविक ब्याज -
अर्थशास्त्र में "ब्याज" शब्द का अभिप्राय शुद्ध ब्याज से होता है| पूँजीपति को पूंजी उधार देने के बदले में जो प्रतिफल मिलता है उसे वास्तविक ब्याज कहते हैं| चैपमैन के अनुसार, "शुद्ध ब्याज पूंजी उधार देने का प्रतिफल है, जिसमें ऋणदाता को कोई जोखिम, असुविधा आदि ना नहीं होती|" इस प्रकार यदि पूंजी उधार देने में कोई जोखिम, असुविधा अथवा प्रबन्ध की आवश्यकता ना हो तो जो ब्याज प्राप्त होगा वह शुद्ध ब्याज ही होगा|

कुल ब्याज अथवा सकल ब्याज -
कुल अथवा सकल ब्याज वह राशि होती है जो ऋणी, ऋणदाता को भुगतान के अतिरिक्त देता है| कुल ब्याज में शुद्ध ब्याज के अलावा जोखिम का पुरस्कार, उधार वसूल करने का खर्च, कष्ट एवं असुविधा का प्रतिफल आदि शामिल होता है|
चैपमैन के अनुसार, "कुल ब्याज में पूँजी उधार देने का पुरस्कार, जोखिम की क्षतिपूर्ति का पुरस्कार, जोखिम चाहे व्यक्तिगत हो या व्यापारिक हो, विनियोग की असुविधाओं का पुरस्कार और विनियोग संबंधी देखभाल कार्य एवं चिंता के पुरस्कार शामिल होते हैं|"
इस प्रकार कुल ब्याज में शुद्ध ब्याज के अलावा अनेक सेवाओं के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार सम्मिलित होता है|

कुल ब्याज एवं शुद्ध ब्याज में अन्तर
कुल ब्याज या सकल ब्याज वास्तविक ब्याज या शुद्ध ब्याज
1. कुल ब्याज विशुद्ध ब्याज, जोखिम तथा असुविधाओं के प्रतिफल का सामूहिक रूप है| 1. वास्तविक ब्याज पूँजी तथा संतोष का प्रतिफल होता है|
2. कुल ब्याज में वास्तविक ब्याज जुड़ा रहता है| 2. वास्तविक ब्याज कुल ब्याज का एक अंशमात्र होता है|
3. सामान्यतः ब्याज को ही कुल ब्याज कहा जाता है| 3. अर्थशास्त्र में ब्याज शब्द वास्तविक ब्याज के लिए प्रयोग में लाया जाता है|
4. कुल ब्याज ऊँची दर पर निर्धारित होता है| 4. वास्तविक ब्याज अपेक्षाकृत कम दर पर निश्चित होता है|