Mahatma Gandhi 'bharat chhodo andolan' kyon shuru karana chahate the or isaka kya parinam hua
मार्च, 1942 ई० में सर स्टैफर्ड क्रिप्स कुछ प्रस्तावों के साथ भारत आये| प्रस्ताव के अनुसार, सुरक्षा के अतिरिक्त भारतियों को भारत सरकार के सभी विभाग हस्तांतरित करने की बात कही गई थी| क्रिप्स का प्रस्ताव 'स्वीकार करो अथवा छोड़ दो' की भावना पर आधारित था| इसे भारतियों ने स्वीकार नही किया| अंततः अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1992 ई० को 'भारत छोड़ो' वाला प्रसिद्ध प्रस्ताव स्वीकार कर दिया तथा आन्दोलन की बागडोर गाँधी जी को सौंप दी|

आन्दोलन के कारण
1. पहला कारण यह था कि जापान के आक्रमण का भय बढ़ रहा था| गांधी जी चाहते थे कि भारत को उस आक्रमण से बचाया जाए यह तभी हो सकता था यदि अंग्रेज लोग भारत को छोड़ देते|
2. दूसरा कारण यह था कि अंग्रेजों की हर जगह हार हो रही थी उनके हाथों से सिंगापुर और बर्मा निकल गए गांधीजी का विचार था कि यदि अंग्रेजों ने हिंदुस्तान को ना छोड़ा तो इस देश के लोगों की भी वही दुर्दशा होगी जो वर्मा और मलाया के लोगों की हुई थी गांधी जी का यह विचार था कि यदि अंग्रेज लोग भारत छोड़ जाए तो जापान भारत पर आक्रमण नहीं करेगा|
3. आंदोलन को आरंभ करने का एक और कारण था कि हिटलर और उसके साथियों का प्रोपेगंडा बढ़ रहा था और उसका प्रभाव भारतीयों पर भी पड़ रहा था| सुभाष चंद्र बोस स्वयं बर्लिन से हिंदुस्तानी भाषा में ब्रॉडकास्ट कर रहे थे ऐसा महसूस किया गया कि भारत की रक्षा के लिए उत्साह पैदा किया जाए और ऐसा तभी हो सकता था जब देश में एक व्यापक आंदोलन हो|
4. वर्मा छोड़ने के समय हिंदुस्तान के लोगों से अच्छा व्यवहार नहीं किया गया उनको भारत लौटते समय अनगिनत कष्ट सहने पड़े इसका परिणाम यह हुआ कि भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध बहुत रोष उत्पन्न हो गया इस वातावरण ने भी गांधी जी को आंदोलन चलाने के लिए विवश किया|
5. द्वितीय विश्व युद्ध के दिनों में अंग्रेजों ने भारत में सब कुछ जलाने की नीति को अपनाया इस नीति से बहुत से हिंदुस्तानियों की हानि हुई| कई लोगों की जमीने नष्ट हो गई और उनको पर्याप्त मुआवजा ना दिया गया बहुतों की रोटी छिन गयी| चीजों की कीमतें बढ़ गई| देश में असंतोष बढ़ गया ऐसी स्थिति से लाभ उठाने के लिए गांधीजी ने अपना आंदोलन आरंभ किया|

आन्दोलन के परिणाम
1. आंदोलन का तत्कालिक परिणाम यह था कि ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्यों को जेल भेज दिया| कांग्रेस संस्था को कानून के विरुद्ध घोषित कर दिया गया उसके कार्यालय पर पुलिस ने कब्जा कर लिया यह नीति सरकार ने कांग्रेस को कुचलने के लिए अपनाई|
2. साधारण जनता हाथ पर हाथ रख कर ना बैठ रही उसने भी सरकार के विरुद्ध विद्रोह आरंभ कर दिया| गांधी जी के मन में यह विचार ही ना था कि सरकार उन्हें अकस्मात बंदी बना लेगी| इसका परिणाम यह हुआ कि गांधी जी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के गिरफ्तार होने के बाद आंदोलन का पथ प्रदर्शन करने के लिए कोई नेता ना रहा जैसा लोगों के मन में आया उन्होंने वैसा ही किया|
3. जब सरकार ने निर्दोष पुरुषों, स्त्रियों तथा बच्चों को गोली से उड़ा दिया तब लोगों ने भी हिंसा की नीति अपनाई जहां कहीं विदेशी मिले उनको मार डाला गया बहुत कठिनाइयों के बाद ब्रिटिश सरकार अपनी सत्ता को देश में फिर से स्थापित करने में सफल हुई|