1. प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना - यह योजना 25 दिसम्बर, 2000 ई० को शुरू हुई थी। इस योजना की शुरुआत देश के सभी गाँवो को पक्के सड़क मार्गो से जोड़ने के लिए किया गया था। इस योजना का वित्तीयन केन्द्रीय सड़क निधि से किया जाता है।

2. प्रधानमन्त्री ग्रामोदय योजना (ग्रामीण पेयजल) - इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था करना है, जहाँ पेयजल उपलब्ध नही है या आंशिक रूप से उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लौह तत्वों, आर्सेनिक तथा फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों से दूर करना भी इस योजना का उद्देश्य है। इस योजना के लिए राज्यों को पेयजलापूर्ति विभाग भारत सरकार के तहत धन जारी किया जाता है।

3. सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY) - 25 दिसम्बर, 2001 ई० को स्व० प० दीनदयाल उपाध्याय के जन्म-दिवस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिर सामुदायिक, सामाजिक तथा आर्थिक परिसंपत्तियों के सृजन सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी, रोजगार तथा खाद्य सुरक्षा देने के लिए सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना का शुभारम्भ किया। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा चलायी जाने वाली इस योजना के लिए वर्ष 2001-2002 ई० हेतु 10,000 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये। पूर्व से चल रही दो योजनाओं (रोजगार आश्वासन योजना तथा जवाहर ग्राम समृद्धि योजना) को 1 अप्रैल, 2002 ई० से सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में समेकित किया गया है।

4. कृषि श्रमिक बीमा योजना - यह योजना जुलाई, 2001 ई० में 18 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के खेतिहर व किराये पर मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने के लिए शुरू की गयी थी।

5. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) - स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना गाँवों में रहने वाले ग़रीबों को स्वरोजगार की देने के लिए शुरू की गयी थी। यह योजना 1 अप्रैल, 1999 ई० को प्रारंभ की गयी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संख्या में सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना करना है।

6. संगम योजना - 15 अगस्त, 1996 ई० को विकलांगो के कल्याण के लिए जिन समाज कल्याण योजनाओं की घोषणा की, संगम योजना उनमे एक प्रमुख योजना है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विकलांगो को समूह में संगठित करके प्रत्येक समूह को विविध आर्थिक क्रियाओं को चलाने के हेतु आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया। विकलांगो के प्रत्येक समूह को संगम नाम दिया गया।

7. कुटीर ज्योति कार्यक्रम - गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले ग्रामीण परिवारों (हरिजन एवं आदिवासी परिवारों सहित) को विद्युत लाभ देने के लिए 1988-89 ई० में कुटीर ज्योति कार्यक्रम आरम्भ किया गया।

8. जवाहर ग्राम समृद्धि योजना - यह योजना पहले की जवाहर रोजगार योजना का का पुनर्गठन, सुव्यवस्थित और व्यापक स्वरूप है। 1 अप्रैल, 1999 ई० को प्रारम्भ की गयी, इस योजना का उद्देश्य गाँव में रहने वाले ग़रीबों का जीवन स्तर सुधारना और उन्हें लाभप्रद रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस योजना को दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़ समग्र देश में सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया गया है।

9. स्कूली बच्चों के लिए दोपहर क्र भोजन की योजना - 1995-96 ई० में आरम्भ की गई इस योजना में प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देने की नीति के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को दोपहर का भोजन देने की व्यवस्था का प्रावधान किया गया। इस कार्यक्रम का क्रियान्वन राज्य सरकारों की एक समिति द्वारा निर्धारित मानदंडो के आधार पर किया जा रहा है।

10. अन्नपूर्णा योजना - निर्धन एवं बेसहारा वयोवृद्धि नागरिकों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा मार्च, 1991 ई० में प्रारम्भ की गयी। 19 मार्च, 1991 ई० को प्रधानमंत्री द्वारा गाजियाबाद जिले के सिखेड़ा गाँव से इस योजना को प्रारम्भ किया गया।

11. एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) - छोटे किसान विकास एजेंसी (SFDA), सीमान्त कृषक एवं कृषि श्रमिक एजेंसी (MFALA), सूखा उन्मुख क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP), काम के बदले अनाज आदि योजनाओं के दोहरेपन को देखते हुए इन सभी योजनाओं को मिलाकर 1978 ई० में एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP) लागू किया गया।1 अप्रैल, 1999 ई० से इस योजना को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में मिला दिया गया।

12. महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम - केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का शुभारम्भ तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ० मनमोहन सिंह ने 2 फरवरी, 2006 को आँध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले से किया गया। अप्रैल, 2008 ई० से इस योजना को सम्पूर्ण देश में लागू कर दिया गया।