15 मार्च, 1946 को इंग्लैण्ड के प्रधानमन्त्री क्लीमेंट एटली ने यह वक्तव्य जारी किया कि ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतन्त्रता प्रदान करने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि भारतियों को अपनी पसंद की सरकार बनाने की स्वतन्त्रता रहेगी। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटिश मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्य इस विषय पर अन्तरिम सरकार के गठन पर विचार करने के लिए भारत जायेंगे।

तदनुसार कैबिनेट मिशन 24 मार्च को दिल्ली पहुंचा। इसमें ब्रिटिश कैबिनेट के तीन मन्त्री सर पैथिक लॉरेन्स, सर स्टेफोर्ड क्रिप्स तथा ए० वी० एलेक्जेंडर शामिल थे। इस मिशन का भारतीय राजनीति में विशेष स्थान है क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से भारतीय स्वतन्त्रता का उल्लेख किया गया था।

भारत पहुँच कर सर लॉर्ड पैथिक ने 25 मार्च को पत्रकारों को बताया - "हम खुला मस्तिष्क लेकर आये हैं। भारत उज्वल भविष्य के द्वार पर खड़ा है।" क्रिप्स ने भी कहा - "हम भी भारतियों को सत्ता सौंपने के उपाय खोजने के लिए आये हैं।" मिशन ने उर्न्त अपना कम शुरू किया तथा 472 भारतिय नेताओं से बात की। मुस्लिम लीग विभाजन की माँग पर अड़ी रही और कार्यवाही की धमकी दी।

कांग्रेस और लीग में समझौता न होने के कारण मिशन 16 मार्च, 1946 को स्वयं अपनी योजना प्रस्तुत की जिसमे कहा गया कि - (1) भारत की एक संघ सरकार होगी, जो केवल वैदेशिक मामलों व यातायात सुरक्षा की व्यवस्था करेगी। (2) प्रान्तों को तीन समूहों में विभाजित किया जाय। एक हिन्दू प्रधान प्रान्तों का, दूसरा और तीसरा समूह पूर्व और उत्तर-पश्चिम में मुस्लिम बहुल प्रान्त होगा। (3) प्रत्येक समूह प्रान्त में स्वशासित रहेगा। अवशिष्ट प्रभुसत्ता। भी प्रान्त के पास रहेगी।

इस मिशन ने संविधान सभा तथा अन्तरिम सरकार के गठन के सम्बन्ध में मुस्लिम लीग तथा कांग्रेस से बातचीत की, किन्तु दोनों ही अपनी जिद पर अड़ रहे थे इसलिए को निर्णय नही निकल सका। मुस्लिम लीग तो पाकिस्तान की माँग पर अटल थी, जबकि कांग्रेस विभाजन के लिए तैयार नही थी। इस मिशन ने लीग तथा कांग्रेस के बीच समझौता करने का प्रयास किया, किन्तु सफलता नही मिली।

कैबिनेट मिशन के इस प्रस्ताव के अनुसार जुलाई, 1946 में चुनाव संपन्न हुए। इन चुनावों में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें प्राप्त हुई तथा केंद्र में पंडित जवाहरलाल नेहरु के नेतृत्व में एक अन्तरिम सरकार की स्थापना हुई। सरकार ने स्वतन्त्र भारत के संविधान निर्माण को ध्यान में रखकर एक संविधान सभा का आयोजन किया। डॉ० राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष नियुक्त किये गए। महान विधिवेत्ता एवं दलित वर्ग के नेता डॉ० बी० आर० अम्बेडकर को इसकी 'प्रारूप समिति' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

इस कार्यवाही ने मुस्लिम लीग को अशांत कर दिया। उसने कैबिनेट योजना को ठुकरा दिया। इतना ही नही पाकिस्तान प्राप्त करने के लिए 'प्रत्यक्ष कार्यवाही' की धमकी दी।