गाँधी जी ने भारतीय राजनीति में प्रवेश करके भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को कुशल नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने भारतीय समाज के पिछड़े और दलितों वर्ग के उत्थान का हर-संभव प्रयास किया, देशवासियों राजनीतिक चेतना जाग्रत की तथा सत्य और अहिंसा की नीति से ही विश्व की महान शक्ति ब्रिटिश साम्राज्य से भारत को मुक्त किया। उनके राजनीतिक विचार ऑर्ट स्वतन्त्रता आन्दोलन में उनके योगदान का वर्णन निम्नलिखित है -

महात्मा गाँधी जी का राष्ट्रीय आंदोलनों में योगदान
1. सत्याग्रह - महात्मा गाँधी की राजनीति एक नये प्रकार की राजनीति थी। इसमें कुटिलता और हिंसक तरीकों का त्याग कर नैतिकता का समावेश किया गया था। गाँधी जी ने सत्याग्रह अर्थात सत्य के लिए आग्रह का महान विचार विश्व के सम्मुख रखा। सत्याग्रह का आन्दोलन करते हुए ही गाँधी जी नेस्वाधीनता की नैतिक लड़ाई लड़ी। गाँधी जी ने कहा था - "सत्याग्रह का अर्थ है - सत्य से छिपते रहना। सत्य की शक्ति प्रेम या आत्मिक शक्ति है।"

2. सत्याग्रह आन्दोलन - चम्पारन जिले में किसान अनेक संकटों से पीड़ित थे। इन किसानों की सुविधा के लिए गाँधी जी ने सत्याग्रह आन्दोलन चलाया और ये बंदी बनाये गए।

3. लखनऊ समझौता - महात्मा गाँधी ने अपना राजनीतिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले को स्वीकार किया। उनकी वैधानिक पद्धति को स्वीकार करते हुए और धैर्य तथा शांति के मार्ग का अनुसरण करते हुए गाँधी जी ने कांग्रेस के दोनों दलों (उग्रवादी दल और उदारवादी दल) का एकीकरण कराया, फिर 1916 ई० में लखनऊ समझौता के माध्यम से गाँधी जी कांग्रेस और मुस्लिम लीग में समझौता करा दिया। यह भारत की राष्ट्रीय भावना का अनूठा संगम था।

4. असहयोग आन्दोलन - महात्मा गाँधी ने प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को संकट में जानकर बहुत सहायता की। अंग्रेज चालाक और धूर्त थे, उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उत्तरदायी शासन देने के स्थान पर अपना दमन चक्र तेजी से चलाया। रॉलेक्ट एक्ट का काला कानून भारतियों की आत्मा को कष्ट दे गया। जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड के माध्यम से अंग्रेजो ने अपनी नृशंसता का परिचय दिया। विवश होकर 1919-1920 ई० में महात्मा गाँधी ने सत्य और अहिंसा पर आधारित असहयोग आन्दोलन चलाया। भारतीय सरकारी कर्मचारियों ने नौकरियाँ छोड़ दी। अनेक लोगों ने अपने पदों और उपाधियों का त्याग कर दिया। विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूल और कॉलेज छोड़ दिए। जनता और पुलिस में झड़प शुरू हो गयी। इस बीच उत्तर प्रदेश में चौरी-चौरा नामक स्थान पर पुलिस चौकी जलाने की उग्र घटना घटी। आन्दोलन के हिंसक ले लेने के कारण गाँधी जी ने इसे स्थगित कर दिया।

5. सविनय अवज्ञा आन्दोलन - सविनय अवज्ञा आन्दोलन का अर्थ है - विनम्रतापूर्वक आज्ञा या कानून की अवमानना करना। अंग्रेजी सरकार के दमन चक्र से परेशान होकर महात्मा गाँधी ने 12 मार्च, 1930 ई० को दांडी यात्रा के साथ सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया। यह आन्दोलन शीघ्र ही प्रगति कर गया। धीरे-धीरे यह जन-आन्दोलन बन गया। कांग्रेस के अधिकांश नेता और महात्मा गाँधी इस आन्दोलन में बन्दी बना लिए गये।

6. गाँधी-इरविन समझौता - ब्रिटिश सरकार सविनय अवज्ञा आन्दोलन से घबरा गयी। लॉर्ड इरविन ने कूटनीति से महात्मा गाँधी को एक समझौते के लिए तैयार कर लिया। मार्च, 1931 ई० में गाँधी-इरविन समझौता हुआ। इसके साथ ही सविनय अवज्ञा आन्दोलन समाप्त हो गया। कांग्रेस ab गोलमेज सम्मलेन में भाग लेने के लिए तैयार हो गयी। गाँधी जी द्वीतीय गोलमेज सम्मेलन में सम्मिलित हुए, किन्तु इसका कोई आशाजनक परिणाम नही निकला। क्रांतकारियों की सजा माफ़ न हो सकी।

7. भारत छोडो आन्दोलन - द्वितीय विश्वयुद्ध के परिस्थितियों और ब्रिटिश सरकार के रवैये से परेशां होकर 1942 ई० में महात्मा गाँधी के निर्देशन में भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव कांग्रेस द्वारा मुंबई अधिवेशन में पारित कर दिया गया। गाँधी जी ने सन्देश दिया - 'करो या मरो।' भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रारम्भ होते ही समस्त कांग्रेसी नेता गिरफ्तार कर लिए गये। यद्यपि ब्रिटिश सरकार ने कठोरता से इसका दमन कर दिया, परन्तु गाँधी जी के इस आन्दोलन ने स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

8. राजगोपालाचारी योजना - महात्मा गाँधी राष्ट्र के सजग प्रहरी थे, इसलिए जेल से छूटने के बाद वे साम्प्रदायिक झगड़े को मिटने के लिए प्रयत्नशील हो गये। उन्होंने सरकार से बात करने से पहले मुहम्मद अली जिन्ना को अपने साथ सहमत करना चाहा। इसलिए मार्च 1944 ई० में उन्होंने राजगोपालाचारी के मध्यम से एक प्रभावी योजना मुहम्मद अली जिन्ना के समक्ष प्रस्तुत की। गाँधी जी की यह योजना राजगोपालाचारी योजना कहलायी, परन्तु जिन्ना इससे सहमत नही हुए। गाँधी जी फिर भी सच्चे हितैषी के रूप में कार्यरत रहे।
इसके बाद गाँधी जी 1944 से 1947 ई० तक भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई बड़े धैर्य से लड़ी। भारत उनके प्रबुद्ध निर्देशन और नेतृत्व में 15 अगस्त, 1947 ई० को स्वतंत्रता प्राप्त कर पाया। इस तरह उनका स्वाधीनता संग्राम उनके और भारतवासियों के भाग्योदय में सफल रहा।