Lord William Bentinck

बैंटिक ने सामाजिक सुधारों से अपने प्रमुख लक्ष्य शासितों को प्रसन्न करने की नीति का अनुसरण किया। उसके सामाजिक सुधारों को संक्षिप्त रूप से निम्नलिखित संदर्भो में जाना जा सकता है -

1. सती-प्रथा की समाप्ति - भारतीय हिन्दू समाज में सती-प्रथा प्रचलित थी। राजा राममोहन राय के प्रोत्साहन से बैंटिक ने 4 दिसम्बर, 1829 ई० को एक कानून बनाकर सती-प्रथा को अवैध घोषित कर दिया।

2. ठगी का अंत - बैंटिक जिस समय भारत का गवर्नर बनकर आया, उस समय समाज ठगों के आतंक से पीड़ित था। ये ठगी का कार्य ही नही करते थे, वरन अक्सर हत्या भी कर देते थे। बैंटिक ने ठगों का अंत करने का निश्चय किया। उसने कर्नल स्लीमैन को इनका दमन करने का उत्तरदायित्व सौंपा। कर्नल स्लीमैन ने कठोरता से इन ठगों का दमन कर दिया।

3. बाल-हत्या का निषेध - भारतीय हिन्दू समाज में कन्याओं की स्थिति बहुत ख़राब थी। राजपूत स्वाभिमान के कारण और अन्य हिन्दू दहेज़ प्रथा की कठिनाईयों कारण कन्याओं की हत्या कर देते थे। बैंटिक ने इस कुप्रथा का अंत करने का प्रयास किया और इसके किये कानून बनाये, परन्तु इस प्रथा का समूल विनास नही हुआ।

4. मानव-बलि का निषेध - भारत के कुछ भू-भागों में ईष्ट देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मनुष्य की बलि दी जाती थी। जैसे - मद्रास (चेन्नई) के क्षेत्र में कुछ जातियाँ तथा उड़ीसा में खोद जाती में। बैंटिक ने इस मानव-बलि की प्रथा को दूर करने के लिए कानून लागू किये।

5. दास-प्रथा का अंत - पुरातन काल से भारत में दास-प्रथा भी चली आ रही थी। लोग भुखमरी और ऋण संकट के कारण दासत्व ग्रहण कर लेते थे। स्वामी इस दासों के साथ बहुत अमानुषिक व्यवहार करते थे। 1832 ई० में बैंटिक ने इस प्रथा को निषिद्ध घोषित कर दिया।

6. विचार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता - बैंटिक मानवीय स्वतंत्रता और मानव अधिकारों का प्रबल समर्थक था। उसने स्पष्ट घोषणा की कि लोगों को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इसलिए बैंटिक ने समाचार पत्रों की स्वतंत्रता पर बल दिया। 1835 ई० में लागू किये गए कानून के अनुसार उसने प्रेस को स्वतन्त्र कर दिया।

7. धर्म परिवर्तन की सुविधा - हिन्दू धर्म की नियमानुसार जो व्यक्ति धर्म बदलता था उसे पैतृक सम्पत्ति से वंचित कर दिया जाता था। इससे लोग इसाई बनने में संकोच करते थे। बैंटिक ने नियम बनाया कि जो लोग ईसाई धर्म ग्रहण करेंगे उन्हें अपनी पैतृक सम्पत्ति से वंचित नही किया जायेगा। इस धर्म परिवर्तन की सुविधा से ईसाई धर्म के प्रचार में बहुत सहयोग मिला।