naitikata ki paribhasha

naitikata ki paribhasha

नैतिकता की परिभाषा

नैतिकता समाज का वह तत्व है, जिसके उपस्थिति में सभ्य समाज का निर्माण किया जा सकता है। नैतिकता मानव का वह अमूल्य वस्तु है, जो उसके सद्गुणों को प्रदर्शित करता है। उचित-अनुचित विचार की संकल्पना को नैतिकता कहा जा सकता है। नैतिकता वह है, जो हमें किसी कार्य को करने की या न करने की आज्ञा देती है। नैतिकता में यह भाव भी समाहित है कि अमुक कार्य अनुचित है, अतः उसे नही करना चाहिए। नैतिकता का आधार पवित्रता, न्याय और सत्य है। अंतरात्मा की सही आवाज नैतिकता है। नैतिकता के मूल्यों को सामाजिक स्वीकृति प्राप्त होती, अतः इसका पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का पावन कर्तब्य बन जाता है। नैतिकता का वास्तविक अर्थ जानने के लिए हमे इसकी परिभाषाओं का अनुशीलन करना होगा।
नैतिकता अच्छाई और बुराई का बोध कराती है। नैतिकता के नियमो का उल्लंघन करने पर व्यक्ति का अन्तःकरण उसे धिक्कारता है। नैतिकता के पीछे सामाजिक शक्ति होती है। नैतिकता, व्यक्ति के अन्तःकरण द्वारा उचित-अनुचित का बोध है।

विभिन्न समाजशास्त्रियों के नैतिकता की परिभाषा निम्नलिखित हैं।
मैकाइवर एवं पेज के अनुसार - "नैतिकता का तात्पर्य नियमों की उस व्यवस्था से है जिसके द्वारा व्यक्ति का अन्तःकरण अच्छे और बुरे का बोध प्राप्त करता है।"
किंग्स्ले डेविड के अनुसार - "नैतिकता कर्तब्य के भावना पर अर्थात उचित व अनुचित पर बल देती है।"
जिसबर्ट के अनुसार - "नैतिक नियम, नियमों की वह व्यवस्था है जो अच्छे और बुरे से सम्बद्ध है तथा जिसका अनुभव अंतरात्मा द्वारा होता है।"
प्रो० कोपर के अनुसार - नैतिकता के साथ व्यवहार के कुछ नियम जुड़े हैं।
जैसे - चोरी न करना, बड़ों का सम्मान करना, चुगली न करना, परिवार का पालनपोषण करना, किसी की हत्या न करना तथा अविवाहितों को यौन सम्बन्ध स्थापित न करना। नैतिकता अच्छाई और बुराई का बोध कराती है। नैतिकता के नियमो का उल्लंघन करने पर व्यक्ति का अन्तःकरण उसे धिक्कारता है। नैतिकता के पीछे सामाजिक शक्ति होती है। नैतिकता, व्यक्ति के अन्तःकरण द्वारा उचित-अनुचित का बोध है।

नैतिकता की विशेषताएँ
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम नैतिकता की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख कर सकते हैं -

  1. नैतिकता व्यवहार के वह नियम हैं जो व्यक्ति में उचित-अनुचित का भाव जगाते हैं।
  2. नैतिकता व्यक्ति के अन्तःकरण की आवाज है। यह सामाजिक व्यवहार का उचित प्रतिमान है।
  3. नैतिकता के साथ समाज की शक्ति जुडी होती है।
  4. नैतिकता तर्क पर आधारित है। नैतिकता का सम्बन्ध किसी अदृश्य पारलौकिक शक्ति से नही होता।
  5. नैतिकता परिवर्तनशील है। इसके नियम देश, काल और परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं।
  6. नैतिकता का सम्बन्ध समाज से है। समाज जिसे ठीक मानता है वही नैतिक है।
  7. नैतिक मूल्यों का पालन व्यक्ति स्वेच्छा से करता है। किसी ईश्वरीय शक्ति के भय से नही।
  8. नैतिकता व्यक्ति के कर्तब्य और चरित्र से जुडी है।
  9. नैतिकता का आधार पवित्रता, ईमानदारी और सत्यता आदि गुण होते हैं।
  10. नैतिकता कभी-कभी धर्म के नियमों का प्रतिपादन करती प्रतीत होती है।

नैतिकता और ज्ञान -
नैतिकता और ज्ञान दोनों ही एक दुसरे के पूरक हैं, महान व्यक्तियों के अन्दर ये दोनों ही गुण होते हैं । नैतिकता ह्रदय से निकलती है और ज्ञान बुद्धि से तथा ह्रदय और बुद्धि दोनों ही इन्सान के अन्दर होते हैं। यदि कोई ज्ञानी पुरुष अध्यात्मिक ज्ञान दे रहा है तो वह अध्यात्मिक ज्ञान अपने ह्रदय और बुद्धि से या किसी धार्मिक किताब से दे रहा होता है, जिसे किसी ज्ञानी पुरुष ने अपने ह्रदय और बुद्धि से ही लिखा है। मानवीय कल्याण के लिए हमे किसी अध्यात्मिक ज्ञान की आवश्यकता नही है बस हमे अच्छे और बुरे कार्यों में फर्क करना आता हो
इन्सान को हमेशा मानवीय कल्याण के लिए अच्छे और बुरे कार्यों की परख करना आवश्यक है जिसे वह अपने ह्रदय और बुद्धि से कर सकता है ।