संसद भवन से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

भारत की संसदीय कार्यवाही संसद भवन में होती है।

संसद भवन का निर्माण 1921-1927 के दौरान किया गया था।

संसद भवन के वास्तुकार एडविन लटियन्स और हर्बर्ट बेकर थे

संसद भवन की आधारशिला 12 फ़रवरी, 1921 को महामहिम द डय़ूक ऑफ कनाट ने रखी थी ।

संसद भवन का उद्घाटन समारोह भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन ने 18 जनवरी, 1927 को आयोजित किया था।

संसद भवन का डिजाईन मध्य प्रदेश के चौंसठ योगिणीं मंदिर की अकृती से प्रेरित है

संसद भवन एक विशाल वृत्ताकार भवन के रूप में है।

संसद भवन का व्यास 560 फुट तथा जिसका घेरा 533 मीटर है।

संसद भवन में कुल खम्भों की संख्या 144 है और प्रत्येक खम्भों की लम्बाई 27 फुट है।

इस भवन का केंद्र बिंदु केंद्रीय कक्ष (सेंट्रल हाल) का विशाल वृत्ताकार ढांचा है। केंद्रीय कक्ष के गुबंद का व्यास 98 फुट तथा इसकी ऊँचाई 118 फुट है।

सन 1947 में अंग्रेजों से भारतीयों के हाथों में सत्ता का ऐतिहासिक हस्तांतरण संसद भवन के इसी कक्ष में हुआ था।

शुरू में केन्द्रीय कक्ष का उपयोग पूर्ववर्ती केन्द्रीय विधान सभा और राज्य सभा के ग्रन्थागार के रूप में किया जाता था।

1946 में इसका स्वरूप परिवर्तित कर इसे संविधान सभा कक्ष में बदल दिया गया।

भारत की संविधान सभा की बैठक (1946-49) संसद भवन की इसी कक्ष में हुई थी।

वर्तमान में संसद भवन के इस कक्ष का प्रयोग दोनों सदनों की संयुक्क्त बैठक के लिए तथा राष्‍ट्रपति और विशिष्‍ट अतिथियों-राज्‍य या शासनाध्‍यक्ष आदि के अभिभाषण के लिए किया जाता है।

संसद भवन के सदन में 550 सदस्यों के लिए 6 भागों में विभक्त 11 पंक्तियों में बैठने की व्यवस्था है

संसद के केंद्रीय कक्ष के तीन ओर लोक सभा, राज्‍य सभा और ग्रंथालय के तीन कक्ष हैं।

इन तीनों कक्षों के चारों ओर एक चार मंजिला वृत्ताकार इमारत बनी हुई है। जिसमें मंत्रियों, संसदीय समितियों के सभापतियों और पार्टी के कार्यालय हैं। लोक सभा तथा राज्‍य सभा सचिवालयों के महत्‍वपूर्ण कार्यालय और संसदीय कार्य मंत्रालय के कार्यालय भी यहीं हैं।

केंद्रीय कक्ष के दरवाजे के ऊपर हमें पंचतंत्र से संस्‍कृत का एक पद्यांश देखने को मिलता है :-
"अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम।।"
अर्थात्: यह मेरा है तथा वह पराया है, इस तरह की धारणा संकीर्ण मन वालों की होती है। किंतु विशाल हृदय वालों के लिए सारा विश्‍व ही उनका कुटुंब होता है।