अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण शब्दावली

विमुद्रीकरण : जब किसी देश में कालाधन अपने चरम स्तर पर पहुँच जाता है और पूरी अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ जाती है, तो इस समस्या से निपटने के लिए उस देश की सरकार विमुद्रीकरण की विधि अपनाती है| इसके अंतर्गत सरकार पुरानी मुद्रा को समाप्त कर नई मुद्रा चालू कर देती है और कालाधन रखने वाले पुरानी मुद्रा के बदले नई मुद्रा के रूप में पकड़े जाने के डर नही बदलते हैं| इस प्रकार काला धन स्वतः समाप्त हो जाती|

मुद्रा स्फीति : मुद्रा प्रसार या मुद्रा स्फीति वह अवस्था है, जिसमे मुद्रा का मूल्य गिर जाता है और कीमते बढ़ जाती हैं, आर्थिक दृष्टि से सीमित एवं नियंत्रित मुद्रा स्फीति, अल्पविकसित अर्थव्यवस्था हेतु लाभदायक होती है, क्योंकि इससे उत्पादन में वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है, किन्तु एक सीमा से अधिक मुद्रा स्फीति हानिकारक है|

रिसेशन : रिसेशन से तात्पर्य मंदी की अवस्था से है, जब वस्तुओं की पूर्ति की तुलना में मांग कम हो, तो रिसेशन की स्थिति उत्पन्न होती है, ऐसी स्थिति में धनाभाव के कारण लोगो की क्रय शक्ति कम होती होती है और उत्पादित वस्तुएँ बिक नही पाती| इससे उद्योगों को बंद करने की प्रक्रिया आरम्भ होती है| बेरोजगारी बढ़ जाती है|

मुद्रा संकुचन : जब बाज़ार में मुद्रा की कमी के कारण कीमते गिर जाती हैं, उत्पादन व व्यापार गिर जाता है और बेरोजगारी बढ़ती है, वह अवस्था "मुद्रा संकुचन" कहलाती है|

सस्ती मुद्रा : वह मुद्रा जिसे नीची ब्याज दर पर प्राप्त की जा सकती है, "सस्ती मुद्रा" कहलाती है|

महंगी मुद्रा नीति : यह नीति सरकार द्वारा स्फीतिक दबाव को रोकने के लिए अपनाई जाती है, जिसमे बैंक दर एवं न्यूनतम तरल कोशानुपात (CRR) को बढाकर साख मुद्रा का मूल्य बढ़ा दिया जाता है, ताकि बैंक कम साख निर्माण कर सके|

पूंजी बाजार व मुद्रा बाजार : सरल भाषा कहें तो जिस प्रकार अन्य वस्तुओं का बाजार होता है, उसी प्रकार मुद्रा का भी बाजार होता है, जहाँ मुद्रा का लेन-देन होता है| मुद्रा बाजार के अंतर्गत उन समस्त व्यक्तियों व वित्तीय संस्थाओं को सम्मिलित किया जाता है, जो अल्पकाल के लिए मुद्रा उपलब्ध करते हैं| इसके विपरीत पूंजी बाजार में दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को सम्मिलित किया जाता है|

रिफ्लेशन : मंदी की अवस्था से निपटने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाये जाते हैं जिससे कि लोगों की क्षमता में वृद्धि हो और वस्तुओं की मांग बढ़े| इसके परिणाम स्वरूप मूल्य स्तर में जो वृद्धि होती है, उसे "रिफ्लेशन" कहते हैं|

स्टेगफ्लेशन : जब मुद्रा स्फीति के साथ-साथ मंदी की स्थिति भी बनती है, तो उस अवस्था को "स्टेगफ्लेशन" कहते हैं|

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक : इस सूचकांक के द्वारा उपभोक्ताओं के विभिन्न वर्गों के लिए खुदरा मूल्य की घटत-बढ़त को प्रदर्शित किया जाता है|
वर्तमान में तीन प्रकार के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक प्रयोग किये जाते हैं, जो निम्नलिखित हैं --

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक कामगार)
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (शहरी गैर-शारीरिक श्रम कर्मचारी)
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (कृषि श्रमिक)

ग्रेशम का नियम : ग्रेशम के अनुसार यदि किसी समय अर्थव्यवस्था में अच्छी व बुरी मुद्रा एक साथ प्रचलन में हो और बुरी मुद्रा परिमाण में सीमित न हो, तो बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को प्रचलन से बहर कर देती है, इसे ही ग्रेशम का नियम कहते हैं|