जब भारत स्वतन्त्र हुआ , तब उसने अपना विकास करने के लिए आर्थिक नियोजन की पद्धति को पंचवर्षीय योजना के नाम से 1 अप्रैल 1951 ई० से लागू किया । पंचवर्षीय योजना को तैयार करने के उद्देश्य से नेहरू मंत्रीमंडल ने अपने एक प्रस्ताव के द्वारा 15 मार्च 1950 को योजना आयोग का गठन किया । योजना आयोग के प्रथम पदेन अध्यक्ष प० जवाहरलाल नेहरू थे ।
अब तक कुल 12 पंचवर्षीय योजना को तैयार किया गया है, जिसमे से 11 पंचवर्षीय योजना पूरी हो चुकी है और 12वीं पंचवर्षीय योजना लागू है, जो 31 मार्च 2017 को समाप्त होगी ।
प्रथम पंचवर्षीय योजना - पहला पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से 31 मार्च 1956 तक चलाई गई थी इसे 'हैरड/डोमर' के विकास माडल पर तैयार किया गया था । पहली पंचवर्षीय योजना में सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की थी ।

दूसरी पंचवर्षीय योजना - दूसरी पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1956 से 31 मार्च 1961 तक चलाई गयी थी । इसे  'महालनोबिस' के विकास माडल पर तैयार किया गया था । इसमें बड़े-बड़े उद्योगों को स्थापित करने का निर्णय लिया था ।

तीसरी पंचवर्षीय योजना - तीसरी पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1961 से 31 मार्च 1966 तक चलाई गयी थी । इस योजना में सरकार ने 'खाद्यानों में आत्मनिर्भरता' प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था ।

चौथी पंचवर्षीय योजना - एक अप्रैल 1966 से 31 मार्च 1969 तक एक-एक वर्ष की तीन योजनाओं को चलाया गया था और चौथी पंचवर्षीय योजना को 1 अप्रैल 1969 से 31 मार्च 1974 तक चलाया गया । सरकार ने चौथी पंचवर्षीय योजना मे 'अर्थव्यवस्था मे आत्मनिर्भरता' प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था और साथ में स्थिरता के साथ-साथ विकास करने का नारा दिया था ।

पांचवी पंचवर्षीय योजना - पांचवी पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1974 से 31 मार्च 1976 तक लागू की गयी थी । जनता पार्टी की सरकार ने इस योजना को चार वर्षो मे ही पूरा घोषित कर दिया था । जिसे बाद में कांग्रेस ने नही माना था । सरकार ने पांचवी पंचवर्षीय योजना में पहली बार 'गरीबी उन्मूलन' को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की थी और इंदिरा जी ने गरीबी हटाओ और देश बचाओ का नारा दिया था ।
 छठी पंचवर्षीय योजना - छठी पंचवर्षीय योजना ऐसी पंचवर्षीय रही है जिसको दो बार तैयार किया गया और दो बार लागू किया गया । पहली बार जनता पार्टी कि सरकार ने इस योजना को तैयार करके लागू किया, जिसे इंदिरा जी ने रद्द कर दिया और खुद तैयार करवा के 1 अप्रैल 1980 से 31 मार्च 1985 तक के लिए लागू किया था । छठी पंचवर्षीय योजना में इंदिरा जी ने  'गरीबी उन्मूलन' को ही सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की थी ।

सातवीं पंचवर्षीय योजना - सातवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1985 से 31 मार्च 1990 तक चलाई गयी थी । इस योजना मे सरकार ने 'रोजी-रोटी' और 'उत्पादकता' का नारा दिया था ।
आठवीं पंचवर्षीय योजना - 1 अप्रैल 1990 से 31 मार्च 1992 तक 1-1 वर्ष की दो योजनाओं को चलाया गया था और आठवीं पंचवर्षीय योजना को 1अप्रैल 1992 से 31 मार्च 1997 तक चलाया गया था । आठवीं पंचवर्षीय योजना को जॉन डब्लू मूलर (John W. Muller) के विकास माडल पर तैयार किया गया था । इसमें सरकार ने पहली बार 'मानव विकास' (Human Development) को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की थी और साथ में सामाजिक न्याय के साथ विकास करने का लक्ष्य रखा था ।

नौवीं पंचवर्षीय योजना - नौवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1997 31 मार्च 2002 तक चलाई गयी थी । इसमें सरकार ने 'मानव विकास के साथ-साथ मानव कल्याण' को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की थी और साथ में सामाजिक न्याय तथा समानता के साथ विकास करने का लक्ष्य रखा था ।

दसवीं पंचवर्षीय योजना - दसवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 2002 से 31 मार्च 2007 तक चलाई गयी थी । इसमें सरकार ने 'कृषि क्षेत्र' और 'औद्योगिक क्षेत्र' दोनो के आधार पर निर्यात के माध्यम से विकास करने का लक्ष्य रखा था ।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना - ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2012 तक चलाई गयी थी । इसमें डॉ० मनमोहन सिंह के सरकार ने 'समावेशी विकास' का लक्ष्य रखा था ।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना - बारहवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 2012 से लागू की गयी है, जो 31 मार्च 2017 तक लागू रहेगी । बारहवीं पंचवर्षीय मे 'तीब्र, सतत और समावेशी' विकास करने का लक्ष्य रखा गया है ।

बारहवी पंचवर्षीय योजना में पहला और दूसरा वर्ष (2012-13) में मनमोहन सिंह का कार्यकाल रहा और तीसरा, चौथा, पांचवा वर्ष में श्री नरेन्द्र मोदी जी का कार्यकाल रहेगा ।