वर्ष 2016 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को बेहद छोटी आणविक (molecular machines) मशीन बनाने के लिये दिया गया है । जीन पियरे सावेज, बर्नार्ड फेरिगा, जे फ्रेजर स्टोडार्ट को संयुक्त रूप से रसायन का नोबेल पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। 8 मिलियन स्वीडिश क्रोना राशि पुरस्कार के तौर पर तीनो वैज्ञानिकों में बराबर-बराबर बाँटा जायेगा

जीन पियरे सावेज
1944 पेरिस में जन्मे जीन पियरे सावेज स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं । इन्होने 1983 में पहली बार आणविक मशीन की दिशा में पहला कदम बढ़ाया और उस समय दो गोल आकार के अणुओं को एक कड़ी के तौर पर जोड़ने में सफलता पायी थी
जे फ्रेजर स्टोडार्ट>
1942में इंग्लैंड में जन्मे जे फ्रेजर स्टोडार्ट अमेरिका के नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं । इन्होने 1991 महीन आणविक धुरी से अणुओं को जोड़ने में सफलता पायी

बर्नार्ड फेरिगा
1951 में नीदरलैंड में जन्मे बर्नार्ड फेरिगो नीदरलैंड के ग्रोनिंगन यूनिवर्सिटी में ऑर्गनिक केमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं । फेरिगो ने 1999 में इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए मोटर विकसित की ।