मै पापिस्तान हूँ, मुझे अपने नाम पर गर्व है । आप अचंभित होंगे कि मै अपने नाम पर गर्व क्यों कर रहा हूँ । लो हम आपको बता ही देते हैं, कि मुझे अपने नाम पर गर्व क्यों है । दरअसल मेरे जन्मदाता ने मेरा जन्म दुनिया में पाप का डंका बजाने के लिए किया था और यहीं से 'पाप' शब्द से 'पापिस्तान' नाम कि उत्पत्ति हुई । मै अपने जन्म से ही अपने पाप के कर्मो पर खरा उतरता आ रहा हूँ । आप टी. वी. समाचार पत्रों में खबर तो सुनते ही होंगे कि भारत में फिर हुआ आतंकवादी हमला, हाँ मै वही हूँ ।
मुझे लोकलाज कहाँ, मै ही तो भारत में आतंकवादी हमला करवाता हूँ और बाद में कन्नी काट लेता हूँ, क्योंकि मुझे लोकलाज कहाँ । आतंकी हमलो का सबूत भी मेरे खिलाफ पेश किया जाता है और मै अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लताड़ा भी जाता हूँ फिर भी मै स्माइल दे देता हूँ, क्योंकि मुझे लोकलाज कहाँ । मै गीदड़ भबकियाँ भी देता हूँ, यह जानते हुए भी कि सामने 'बाघ' खड़ा है, लेकिन मै उसके शांति प्रिय होने का फायदा उठा लेता हूँ, क्योंकि मुझे लोकलाज कहाँ ।

मै अपने जन्म से ही अपने कर्तब्यों का निर्वाह करता चला आ रहा हूँ, जानना नहीं चाहोगे मेरे अनमोल कर्तब्य, लो मै आपको बता ही देता हूँ ।
भारत में अशांति फैलाना, भारत को विकास की राह पर चलता देख भारत से जलना, भारत में कुत्तो को भेजकर निहत्थो, मासूमो को लहूलुहान करना, झूठी बातों का बयान देकर भारत को अन्तर्राष्ट्रीय मंचो पर नीचा दिखाना, भारत के दुश्मनों को अपना दोस्त बनाना और उन्हें पनाह देना ।

लोग कहते हैं कि, पहले तू अपने घर को संभाल फिर कश्मीर कि बात कर । मुझे ऐसी बातें सुनकर बहुत हैरानी होती है कि मै अपने घर में क्या देखूं युवाओं का भविष्य, इन्हें भारत के युवाओं कि तरह डॉक्टर, इंजीनियर थोड़े ही बनाना है इन्हें तो आतंकवदी बनाना है । आप ही सोंचे जब बनाने वाले ने मेरा ही भविष्य नही बनाया तो मै पापिस्तान के युवाओं का भविष्य कहाँ से बनाऊँ । इन्हें पढ़ा-लिखा कर लोकलाज थोड़े ही सिखाना है इन्हें तो कश्मीर में जाकर गोलियाँ ही चलाना है । इसी बात पर मुझे एक कविता सूझी है ।

कश्मीर तो एक बहाना है
                              भारत में आतंक फैलाना है ।।
मुझे पाप कि गठरी बढ़ाना है
                              निहत्थों पर गोलियां चलाना है ।।
आतंको का शहर बसाना है 
                              स्कूलों कि जगह आतंकी प्रशिक्षण कैंप बनाना है ।।
कश्मीर तो एक बहाना है
                              भारत में आतंक फैलाना है ।।

मै सुरों का प्रशिक्षण लेकर कश्मीर राग अलापता हूँ, फिर भी दुनिया मुझे बेसुरा ही समझती है । मै दुनिया को बहुत बुरा भविष्य देने वाला हूँ । जिसे लोग आतंक कहते हैं । मै बहुत गर्वान्वित हूँ, मुझे लोकलाज कहाँ, बल्कि 'लोकलाज' शब्द मेरे डिक्शनरी में ही नहीं है ।

मै चुलबुल हूँ, मै शरारती हूँ क्योंकि मै परमाणु हमले की धमकी देता हूँ मुझे पता है मेरी औकात पर मै तो शरारती हूँ मुझे लोकलाज कहाँ ।

अमेरिका मेरे घर में घुस कर अपने दुश्मनों को मार गिराता है और मै तब मौन धारण कर लेता हू क्योंकि मुझे उसके दिए हुए टुकड़ो पर ही जीना है, मुझे लोकलाज कहाँ । मै बनावटी हूँ, मै दिखावा हूँ मै देश ही नहीं हूँ, क्योंकि मेरा आधार ही दिखावे पर बना है । मै अकल्पनाओं कि कल्पना हूँ फिर भी मै अस्तित्व में हूँ । लोग मुझे तोहमत देते हैं, लेकिन मुझे लोगों की फिकर नहीं करनी चाहिए क्योंकि मुझे दशकों से चली आ रही पाप कि परम्पराओं का निर्वाह भी तो करना है । मै गफलत में जीता हूँ, हमला करता हूँ और हार जाता हूँ और फिर हमला करता हूँ और फिर हार जाता हूँ ।

मेरी अलग ही सोंच है, मेरा अलग ही सिद्धांत है । मै अपने ही राह पर चलता हूँ ।
'' ढाई आखर 'टैंक' का पढ़ा सो बलबूता होय ''

मेरी अलग ही पहचान है, मेरा अलग ही अंदाज है । मै अपने में ही मशगूल रहता हूँ ।
'' बकरा खड़ा दुकान पे
                 मांगै सबसे बैर
औरन को मार दो
                 आपहु हो जायो ढेर । ''

मुझे कम मत समझना मै भौकने वाले कुत्ते नहीं पालता मै सिर्फ काटने वाले कुत्ते ही पालता हूँ । मै ऐसे ही कुत्तों का संरक्षक हू । मै दुनिया के ऐसे ही कुत्तों से आह्वान करता हूँ, कि आओ हमारे यहाँ रहो, खाओ, पीओ, मौजमस्ती करो लेकिन मौका मिले तो भारत को काटना जरूर ।

कश्मीर हड़पने कि मेरी अलग ही नीति है । हालाँकि मै गोपनीय नीति को आपसे साक्षा करके अपने देशवाशियों से गद्दारी नही कर सकता फिर मै आपको बता ही देता हूँ मै कश्मीर को हड़पकर कश्मीर के सेब के बागानों में सेब कि जगह बम, मोर्टार उत्पादन करके उल्टे चीन को ही हथियार निर्यात कर देना चाहता हूँ । मै खुशहाल, विकास, उन्नति, GDP ग्रोथ जैसे शब्द सुनकर बहुत गुस्सा हो जाता हूँ मुझे इतना गुस्सा आ जाता है कि मै गुस्से से काला, नीला हो जाता हूँ, मुझे तो मेरे कर्ण प्रिय शब्द आतंकवाद, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी, पिछड़ापन जैसे शब्द सुनकर आनन्द ही आनन्द आ जाता है ।

मै बहुत ही हठी हूँ, मै बहुत जिद्दी हूँ जब मै एक बार कश्मीर राग अलापना शुरू कर दिया तो मै रुकने का नाम नहीं लेता । मै किसी का एहसान नहीं लेना चाहता उदहारण के तौर पर जिस देश के धरती से नदियाँ होकर मेरे खेतों तक पहुँचती हैं उस देश की धरती पर मै खून कि नदियाँ बहा देता हूँ । 
मै बहुत शरीफ हूँ, इतना शरीफ हूँ कि दुनिया के लिए मिशाल के तौर पर पेश किया जाता हूँ । मेरे शरीफी के कारण ही मुझे आतंकवाद राष्ट्र का तमगा मिला । यह मेरे लिए बहुत ही गर्व कि बात है । बहुत जल्द ही मै गिनीज बुक में अपना रिकॉर्ड दर्ज करा लूंगा ।

बस-बस बहुत अपनी बड़ाई कर ली अब मै एक शब्द नहीं बोलूँगा नहीं तो लोग कहेंगे ।
'' अपने मुह मिटठू मिया '' 

लेखक- राजेंद्र कुमार