गुप्त वंश (280 ई० - 550 ई०)
गुप्त वंश के प्रमुख शासक निम्नलिखित हैं।
1. श्रीगुप्त (240 - 280 ई०)
2. घटोत्कच्छ (280 - 319 ई०)
3. चन्द्रगुप्त प्रथम (319 - 334 ई०)
4. समुद्र गुप्त (334 - 375 ई०)
5. चन्द्रगुप्त द्वितीय (375 - 415 ई०)
6. कुमार गुप्त (415 - 455 ई०)
7. स्कन्द गुप्त (455 - 467 ई०)

1. श्रीगुप्त (240 - 280 ई०) - श्रीगुप्त 'गुप्त वंश' का संस्थापक था और 'महाराज' की उपाधि धारण किया था।

2. घटोत्कच्छ (280 - 319 ई०) - घटोत्कच्छ, श्रीगुप्त का पुत्र था यह भी अपने पिता के सामान 'महाराज' की उपाधि धारण किया था।

3. चन्द्रगुप्त प्रथम (319 -334 ई०) - चन्द्रगुप्त प्रथम को 'गुप्त वंश' का वास्तविक संस्थापक मन जाता है। 319 ई० में इसने अपने राज्याभिषेक के औसर पर 'गुप्त संवत' को आरम्भ किया था। चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवि वंश की राजकुमारी 'कुमार देवी' से विवाह किया था।
सर्व प्रथम चांदी का सिक्का जरी करने का श्रेय चंद्रगुप्त प्रथम को दिया गया है।

4. समुद्र गुप्त (334 - 375 ई०) - समुद्र गुप्त लिच्छवी वंश की कुमार देवी का पुत्र था। इलाहबाद अभिलेख के अनुसार समुद्र गुप्त कभी भी पराजित नही हुआ था। इसलिए इतिहासकार 'विंसेट स्मिथ' समुद्र गुप्त को भारत का 'नेपोलियन' कहा था। समुद्र गुप्त को सिक्के पर 'वीणा' बजाते हुए दिखाया गया है। अर्थात वह वीणा वादक था तथा कविराज की उपाधि धारण किया था। समुद्र गुप्त ने 'अश्वमेघ यज्ञ' कराया था। इसके दरबार में कवि, मंत्री और सेनापति के पद पर हरिषेण था। 'प्रयाग प्रशस्ति' हरिषेण का प्रमुख ग्रन्थ था।

5. चन्द्रगुप्त द्वितीय (375 - 415 ई०) - इसका एक दूसरा नाम 'देवराज या देवगुप्त' था। अपने बड़े भाई रामगुप्त की पत्नी 'ध्रुव देवी या ध्रुव स्वामिनी' से विवाह किया था। शको पर विजय के उपलक्ष्य में 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण किया था। इसके समय में चीनी यात्री 'फाह्यान' भारत आया था। चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में नौरत्न थे जो निम्नलिखित हैं।
1. कालिदास
2. अमर सिंह
3. वाराह मिहिर
4. बेताल भट्ट
5. वररुचि
6. धनवन्तरी
7. क्षणपक
8. शंकु
9. घटकर्पन

6. कुमार गुप्त (415 - 455 ई०) - कुमार गुप्त का एक दूसरा नाम 'महेंद्रदित्य' था। इसने अश्वमेघ यज्ञ कराया था। कुमार गुप्त ने बिहार में 'नालंदा विश्वविद्यालय' की स्थापना कराया था। इसके दरबार में कवि, मंत्री और सेनापति के पद पर विद्वान् 'वत्स्यभट्टि' था।

7. स्कन्द गुप्त (455 - 467 ई०) - स्कन्दगुप्त का एक दूसरा नाम 'विक्रमादित्य' था। मध्य एशिया से आये 'हूणों' का आक्रमण स्कन्द गुप्त के समय में ही हुआ था। स्कन्द गुप्त ने सफलता पूर्वक हूणों का सामना किया था। स्कन्द गुप्त ने 'सुदर्शन झील' का सुंदरीकरण कराया था।