⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश का संस्थापक था
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्य की सहायता से अंतिम नन्द वंशीय शासक घनानन्द को पराजित कर मगध के सिंहासन पर बैठा
⇒ पाटलिपुत्र चन्द्रगुप्त मौर्य की राजधानी थी
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य 322 ई०पू० में मगध के सिंहासन पर बैठा
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य भारत पर विशाल साम्राज्य स्थापित करने वाला प्रथम शासक था
⇒ बौद्ध ग्रन्थ 'दिव्यावदान' में चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिन्दुसार और अशोक को क्षत्रिय कहा गया
⇒ बौद्ध अनुश्रुतियों में उसको एक ग्रामीण मयूरपोषक जाति के किसी सरदार का पुत्र कहा गया है
⇒ मध्यकालीन अभिलेखों के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य सूर्यवंशी मांधाता से उत्पन्न थे
⇒ महावंश चन्द्रगुप्त कोमोरिय (मौर्य) खत्तियों से पैदा हुआ बताता है
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य के बाल्यकाल में उसकी शौर्य और साहस से प्रभावित होकर 'चाणक्य' उसे अपने साथ तक्षशिला ले गया
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य ने यूनानी शासक 'सेल्यूकस निकेटर' को पराजित किया
⇒ सेल्यूकस निकेटर ने 'मेगस्थनीज' को अपने राजदूत के रूप में चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा
⇒ जस्टिन के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य एक डाकू था जिसने छोटे-बड़े जीत से प्रभावित होकर साम्राज्य स्थापित करने का निश्चय किया
⇒ मुद्राराक्षस से ज्ञात होता है कि चन्द्रगुप्त मौर्य हिमालय प्रदेश के राजा पर्वतक से संधि की
⇒ श्रवणबेलगोला से मिले शिलालेखों के अनुसार चन्द्रगुप्त अपने अंतिम दिनों में जैन-मुनि हो गये
⇒ चन्द्रगुप्त मौर्य अपने अंतिम दिनों में श्रवणबेलगोला के चंद्रगिरि नामक पहाड़ी पर निवास करते थे