चुम्बकत्व

भौतिकी में चुम्बकत्व वह प्रक्रिया है, जिसमें एक वस्तु दूसरी वस्तु पर आकर्षण या प्रतिकर्षण बल लगाती है। जो वस्तुएँ यह गुण प्रदर्शित करती हैं, उन्हें चुम्बक कहते हैं। निकल, लोहा, कोबाल्ट एवं उनके मिश्रण आदि सरलता से पहचाने जाने योग्य चुम्बकीय गुण रखते हैं। ज्ञातव्य है कि सब वस्तुएं न्यूनाधिक मात्रा में चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति से प्रभावित होती हैं।

चुम्बकत्व अन्य रूपों में भी प्रकट होता है, जैसे विद्युतचुम्बकीय तरंग में चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति।

चुम्बकीय पदार्थ

  • लौहचुम्बकीय (फेरोमैगनेटिक)
  • अनुचुम्बकीय (पैरामैगनेटिक)
  • प्रतिचुम्बकीय (डायामैगनेटिक)
  • लघु लोह-चुंबकीय या फेरीचुम्बकीय (फेरीमैगनेटिक)
  • एंटीफेरीचुम्बकीय

विद्युतचुम्बकत्व से सम्बन्धित इकाइयाँ

Magnetic lines of force of a bar magnet shown by iron filings on paper

चुम्बकत्व से संबंधित SI इकाइयाँ

विद्युतचुम्बकत्व की एसआई इकाइयाँ
संकेत मात्रा का नाम व्युत्पन्न इकाई इकाई मूल इकाई
I विद्युत धारा एम्पीयर (SI base unit) A A = W/V = C/s
q विद्युत आवेश, विद्युत की मात्रा कूलम्ब C A·s
V विभवांतर या विद्युतवाहक बल वोल्ट V J/C = kg·m2·s−3·A−1
R, Z, X प्रतिरोध, प्रतिबाधा, प्रतिघात (Reactance) ओह्म Ω V/A = kg·m2·s−3·A−2
ρ प्रतिरोधकता ओम प्रति मीटर Ω·m kg·m3·s−3·A−2
P शक्ति वाट W V·A = kg·m2·s−3
C धारिता फॅराड F C/V = kg−1·m−2·A2·s4

व्युत्क्रम धारिता व्युत्क्रम फैराड F−1 V/C = kg·m2·A−2·s−4
ε Permittivity फैराड प्रति मीटर F/m kg−1·m−3·A2·s4
χe वैद्युत प्रवृत्ति (Electric susceptibility) (विमाहीन) - -
G, Y, B चालन, Admittance, Susceptance सीमेन्स S Ω−1 = kg−1·m−2·s3·A2
σ चालकता सिमेंस प्रति मीटर S/m kg−1·m−3·s3·A2
B चुम्बकीय क्षेत्र टेस्ला T Wb/m2 = kg·s−2·A−1 = N·A−1·m−1
Φm चुम्बकीय फ्लक्स वेबर Wb V·s = kg·m2·s−2·A−1
H चुम्बकीय क्षेत्र एम्पीयर प्रति मीटर A/m A·m−1

Reluctance एम्पीयर-टर्न प्रति वेबर A/Wb kg−1·m−2·s2·A2
L प्रेरकत्व हेनरी H Wb/A = V·s/A = kg·m2·s−2·A−2
μ पारगम्यता (Permeability) हेनरी प्रति मीटर H/m kg·m·s−2·A−2
χm चुम्बकीय प्रवृत्ति (Magnetic susceptibility) (विमाहीन)

विद्युतचुम्बकत्व की एसआई इकाइयाँ

1.विद्युत धारा - किसी सतह से जाते हुए, जैसे किसी तांबे के चालक के खंड से; विद्युत धारा की मात्रा (एम्पीयर में मापी गई) को परिभाषित किया जा सकता है :- विद्युत आवेश की मात्रा जो उस सतह से उतने समय में गुजरी हो यदि यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से Q कूलम्ब का आवेश t समय में निकला; तो औसत धारा

I = \frac{Q}{t}
मापन का समय t को शून्य (rending to zero) बनाकर, हमें तत्क्षण धारा i(t) मिलती है :
i(t) = \frac{dQ}{dt}
एम्पीयर, जो की विद्युत धारा की SI इकाई है।

 2 . विद्युत आवेश - विद्युत आवेश कुछ उपपरमाणवीय कणों में एक मूल गुण है जो विद्युतचुम्बकत्व में महत्व है। आवेशित पदार्थ को विद्युत क्षेत्र का असर पड़ता है और वह ख़ुद एक विद्युत क्षेत्र का स्रोत हो सकता है।

3.विभवान्तर - किन्हीं दो बिन्दुओं के विद्युत विभवों के अंतर को विभवान्तर (पोटेन्शियल डिफरेन्स) या 'वोल्टता' (voltage) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, इकाई धनावेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किए गए कार्य को उन दो बिन्दुओं के बीच का विभवान्तर कहते हैं। विभवान्तर को वोल्टमापी द्वारा मापा जाता है। वोल्टता, किसी स्थैतिक विद्युत क्षेत्र के द्वारा, विद्युत धारा के द्वारा, किसी समय के साथ परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र के कारण या इनमें से किसी दो या अधिक के कारण पैदा होता है।
विभवान्तर की ईकाई वोल्ट
इसे v से व्यक्त करते हे।
v=w/q अर्थात w=कार्य,q=आवेश
चूँकि जब हम किसी बिंदु आवेश को किसी दूसरे आवेश के वैधुत क्षेत्र में एक स्थानb से दूसरे स्थानa तक ले जाते है। तो हमें वैधुत बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यही कार्य उन दोनों स्थानों के बीच वैधुत विभवांतर है।
 सूत्र- Va-Vb=W/q जहाँ w आवेश को bसेa तक ले जाने में किया कार्य है।

4.प्रतिरोध - रजिस्टर करंट के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करता है और उसे हम ओह्म (Ω) में मापते हैं। ये मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं। कार्बन, फिल्म, वायरवाउंड और सेमीकन्डक्टर. इसके अलावा थर्मिस्टर जो तापमान के हिसाब से अपना प्रतिरोध घटता या बढाता है और वेरिअबल रजिस्टर जिसे प्रीसेट भी कहते हैं। रजिस्टर की क्षमता हम उसके ऊपर की गयी कलर कोडिंग से कर सकते हैं। सामान्यतः एक रजिस्टर के ऊपर चार कलर होते हैं। उनमे से तीन पास पास और एक थोडा अलग हट कर होता है।

5.धारिता - किसी चालक की वैद्युत धारिता (कैपेसिटी या कैपेसिटेंस), उस चालक की वैद्युत आवेश का संग्रहण करने की क्षमता की माप होती है। जब किसी चालक को आवेश दिया जाता है तो उसका वैद्युत विभव आवेश के अनुपात में बढता जाता है। यदि किसी चालक को q आवेश देने पर उसके विभव में V वृद्धि हो, तो
q अनुक्रमानुपाती V
q = CV
जहाँ C एक नियतांक है जिसका मान चालक के आकार, समीपवर्ती माध्यम तथा पास में अन्य चालकोँ की उपस्थिति पर निर्भर करता है। इस नियतांक को 'वैद्युत धारिता' कहते हैँ। ऊपर के समीकरण q = CV से
C = q / V
इस प्रकार, किसी चालक की वैद्युत धारिता चालक को दिये गये आवेश तथा चालक के विभव मेँ होने वाली व्रिद्धि के अनुपात को कहते हैँ। धारिता का SI मात्रक कूलाम/वोल्ट है। इसे 'फैरड' कहते है तथा इसे F से निरुपित करते हैं। इस प्रकार,
1 फैरड =1 कूलाम/वोल्ट
धारिता का emu में मात्रक ‛स्टेट फैरड’ होता है।
1 फैरड =9×1011 स्टेट फैरड
1 माइक्रोफैरड = 10-6 फैरड
1 नैनोफैरड=10-9 फैरड
1 पीकोफैरड=10-12 फैरड
इसी प्रकार C=q/v से-
यदि v=1वोल्ट, C=q तो किसी चालक की वैधुत धारिता चालक को दी गयी आवेश की वह मात्रा है जो चालक के विभव में एक वोल्ट का परिवर्तन कर दे।
वैधुत धारिता एक अदिश राशि है। वैधुत धारिता का मान सदैव धनात्मक होता है। क्योकि चालक पर आवेश तथा इसके कारण विभव में परिवर्तन के चिन्ह सामान होते हैं।
धारिता का विमीय सूत्र - [T×T×T×T×A×A/M×L×L] है। चालक के माध्यम का परावैद्युतांक बढ़ने से धारिता भी बढती है।
किसी चालक की धारिता निम्न तथ्यों पर निर्भर नहीं करती है-
  • (१) चालक के आवेश पर - q का मान बढ़ने पर v का मान भी उसी अनुपात में बढ़ता है। अतः धारिता नियत रहती है।
  • (२) चालक के पढ़ार्थ पर
5.चालन - जिस किसी पदार्थ से विद्युत् धरा का प्रवाह हो सके उसे चालक कहते हैं और चालक का ये गुण चालन कहलाता है। उदाहरण के लिए आप किसी भी धातु को ले सकते हैं जैसे लोहा, चांदी, सोना इत्यादि.
किसी भी वस्तु में दो स्तर होते हैं जिसे हम वैलंस बैंड तथा कंडकशन बैंड कहते हैं। इन दोनों कि बीच कि दूरी फोर्बिडन गैप कहलाती है। किसी भी वस्तु में एलेक्ट्रोंस प्रवाहित होना इस बात पर निर्भर करता है की क्या एलेक्ट्रोंस वैलंस बैंड से कंडकशन बैंड में जा सक रहा है या नहीं. अगर हाँ तो इसका मतलब है की उस वस्तु में करंट प्रवाहित हो रहा है। चालक में दोनों बैंड मिले हुए रहते हैं मतलब फोर्बिडन गैप नहीं रहता है इसलिए इसमें से एलेक्ट्रोंस या करंट आसानी से प्रवाहित होते हैं।

7.चालकता - पदार्थों द्वारा विद्युत धारा संचालित करने की क्षमता के माप को विद्युत चालकता (Electrical conductivity) या विशिष्ट चालकता (specific conductance) कहते हैं। जब किसी पदार्थ से बने किसी 'चालक' के दो सिरों के बीच विभवान्तर आरोपित किया जाता है तो इसमें विद्यमान घूम सकने योग्य आवेश प्रवाहित होने लगते हैं जिसे विद्युत धारा कहते हैं। आंकिक रूप से धारा घनत्व \mathbf{J} तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \mathbf{E} के अनुपात को चालकता (σ) कहते हैं। अर्थात -
\mathbf{J} = \sigma \mathbf{E}.

विद्युत चालकता के व्युत्क्रम (reciprocal) राशि को विद्युत प्रतिरोधकता (ρ) कहते हैं जिसकी SI इकाई सिमेन्स प्रति मीटर (S·m-1) होती है।
\sigma = {1\over\rho}.
8.चुंबकीय क्षेत्र - चुंबकीय क्षेत्र' विद्युत धाराओं और चुंबकीय सामग्री का चुंबकीय प्रभाव है। किसी भी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र दोनों, दिशा और परिमाण (या शक्ति) द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है; इसलिये यह एक सदिश क्षेत्र है। चुंबकीय क्षेत्र घूमते विद्युत आवेश और मूलकण के आंतरिक चुंबकीय क्षणों द्वारा उत्पादित होता हैं जो एक प्रमात्रा गुण के साथ जुड़ा होता है।

9.चुम्बकीय फ्लक्स - चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic flux) वह भौतिक राशि है जो किसी तल (जैसे किसी चालक तार की कुण्डली) से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय क्षेत्र का सम्पूर्ण परिमाण की माप है। इसे संक्षेप में Φm से निरूपित किया जाता है। इसका SI मात्रक वेबर (weber) है ; व्युत्पन्न मात्रक वोल्ट-सेकेण्ड है तथा CGS मात्रक 'मैक्सवेल' है।
चुम्बकीय फ्लक्स अत्यन्त महत्वपूर्ण भौतिक राशि है क्योंकि -
  • किसी बन्द लूप में उत्पन्न विद्युतवाहक बल का मान उस लूप में स्थित चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के बराबर होता है (फैराडे का प्रेरण का नियम)
  • विभिन्न स्थितियों में लगने वाले चुम्बकीय बल का परिमाण फ्लक्स घनत्व (B) का फलन होता है। उदाहरण के लिये किसी चुंबकीय क्षेत्र में में गतिशील किसी आवेशित कण पर लगने वाला बल = q v B .
10.प्रेरक - प्रेरक (inductor or a reactor) एक वैद्युत अवयव है जिसमें कोई विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह चुम्बकीय क्षेत्र के रूप में उर्जा का भंडारण करता है। प्रेरक द्वारा चुम्बकीय उर्जा के भंडारण की क्षमता को इसका प्रेरकत्व (inductance) कहा जाता है और इसे मापने की इकाई हेनरी है।