भारत सरकार ने जारी किए 2011 की जनगणना के धार्मिक आंकड़े । 2011 की जनगणना के अनुसार पहले दशक में देश की कुल जनसंख्या में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी करीब एक फीसद बढ़ी है। वहीं, हिन्दुओं  और सिखों की हिस्सेदारी कम हुई है। धर्म आधारित जनगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2001 से 2011 के दौरान देश में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर औसत से आठ फीसद अधिक और हिन्दुओं की एक फीसद कम रही है। वहीं सिख, जैन और बौद्ध समुदाय की आबादी की बढ़ोतरी दर भी औसत से काफी नीचे रही है। 12011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक मुस्लिम की कुल संख्या 17 करोड़ 22 लाख है, जो कुल 121 करोड़ की आबादी का 14.2 फीसद बैठता है। 2001 में देश में मुस्लिम आबादी 13 करोड़ 81 लाख यानी कुल जनसंख्या का 13.4 फीसद थी। जाहिर है पिछले एक दशक में मुस्लिम आबादी लगभग साढ़े तीन करोड़ बढ़ी है। यानी इस दौरान 24.6 फीसद की बढ़ोतरी दर रही, जो पूरी जनसंख्या की औसत वृद्धि दर 17.7 से लगभग सात फीसद अधिक है। 1ध्यान देने के बात है कि इस दौरान मुसलमान को छोड़कर दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों की कुल आबादी में हिस्सेदारी या तो कम हुई है या पिछली बार के समान रही है। जैन और ईसाई समुदाय की आबादी में हिस्सेदारी में कोई अंतर नहीं आया। इन दोनों समुदायों की हिस्सेदारी क्रमश: 0.4 फीसद और 2.3 फीसद है। आबादी में हिस्सेदारी कम होने वाले अल्पसंख्यक धार्मिक समुदाय में सिख और बौद्ध अहम हैं। 2001 में सिख समुदाय की हिस्सेदारी 1.9 से घटकर 1.7 फीसद रह गई है। इसी तरह बौद्धों की हिस्सेदारी 0.8 फीसद से घटकर 0.7 फीसद रह गई है। दरअसल इस दौरान जनसंख्या बढ़ोतरी दर में बौद्ध और सिख समुदाय औसत से काफी पीछे रहे। सिखों की जनसंख्या की औसत बढ़ोतरी दर 8.4 फीसद और बौद्धों की 6.1 फीसद रही है। जबकि 29 लाख लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने अपना धर्म नहीं बताया।
आबादीहिस्सेदारी
हिन्दू 96.63 करोड़79.8 फीसद
मुस्लिम 17.22 करोड़14.2 फीसद
ईसाई2.78 करोड़ 2.3 फीसद
सिख 2.08 करोड़ 1.7 फीसद
बौद्ध84 लाख0.7 फीसद
जैन 45 लाख0.4 फीसदी
अन्य 79 लाख 0.7 फीसदी
धर्म नहीं बताया29 लाख0.2 फीसदी