(1) पागलपंथी विद्रोह (1813- 33) - पूर्वोत्तर भारत मे अंग्रेजो का जब स्थानीय प्रशासन पर कब्जा हो गया तो पागलपंथी संप्रदाय ने  नेता टीपू के नेतृत्व मे सत्य, समानता, और भाईचारे के सिद्धांत को लागू करने के लिए विद्रोह किया गया । इस विद्रोह ने अंग्रेजी प्रशासन को हिला कर रख दिया । लेकिन जल्द ही विद्रोह का दमन हो गया।

(2) संन्यासी विद्रोह (1770-80) - जब
बंगाल मे भीषण अकाल 1770 बंगाल मेँ अराजकता ओर व्यवस्था उत्पन्न हो गई उसी समय अंग्रेजो ने जनता के तीर्थ यात्रा पर प्रतिबंध लागू कर दिया संयासी विद्रोह का कारण बना ।

(3) वहाबी आंदोलन (1820-70) - सैयद  अहमद बरेलवी के नेतृत्व मे विलायत अली, इनायत अली, मौलवी कासिम अब्दुल्ला के साथ मिलकर वहाबी आंदोलन चलाया सैयद अहमद बरेलवी का मकसद भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त करा कर मुस्लिम राज्य स्थापित करना था ।

(4) कूका आंदोलन - भगत जवाहर माल  (सियान साहब) के नेतृत्व मे शिष्य बालक सिंह के साथ पंजाब मे अंग्रेजी प्रभुत्व को खत्म करके सिख समाज मे व्याप्त बुराइयो को दूर करके सिख राज्य स्थापित करना था ।

(5) फकीर विद्रोह (1776-77) - भवानी पाठक और देवी चौधरानी आदि हिंदू नेताओं की मदद से मजनू शाह एवं चिराग अली शाह के नेतृत्व मे विद्रोह किया यह विद्रोह बंगाल मे मुस्लिम घुमक्कड़ धार्मिक फकीर का विद्रोह कहा गया ।

(6) रामोसी विद्रोह (1822) - महाराष्ट्र मे  जब अंग्रेजी हुकूमत ने कर बढ़ा दिया तो मराठा सैनिको ने उमा जी के नेतृत्व मे विद्रोह कर दिया ।

(7) वेंलुटपी विद्रोह (1808-09) - केरल के त्रावणकोर के दीवान वेंलुटपी की गद्दी छीन लेने तथा एक तरफा संधि के लिए विवश करने पर यह विद्रोह किया गया ।
(8) गडकरी विद्रोह (1844) - ब्रिटिश सरकार द्वारा भू-राजस्व वृद्धी पर गडकारीयो ने विद्रोह किया । ब्रिटिश सरकार को गडकरी विद्रोह का दमन करने मे पुरी ताकत झोंकनी पड़ी ।